
नए साल 2026 के आते ही सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों पर टैक्स बढ़ने के कारण उनकी कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला। उपभोक्ताओं को अब पहले से महंगी सिगरेट खरीदनी पड़ रही है, जिससे बाजार और जेब दोनों पर असर पड़ा है। दुकानदारों का कहना है कि महंगाई के कारण बिक्री पर असर पड़ा है, जबकि खरीदारों को अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, सिगरेट पर जीएसटी 28 प्रतिशत ही बनी हुई है, लेकिन इसके साथ लगने वाला Compensation Cess (क्षतिपूर्ति उपकर) और अन्य करों में वृद्धि हुई है। कुल मिलाकर टैक्स का बोझ 40 प्रतिशत या उससे अधिक हो गया है। इसके कारण खुदरा कीमतों में ₹2 से ₹5 प्रति सिगरेट और ₹40 से ₹100 प्रति पैकेट तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
सरकार ने सिगरेट को हानिकारक वस्तु (Sin Goods) की श्रेणी में रखा है। इसका उद्देश्य न केवल राजस्व बढ़ाना है, बल्कि धूम्रपान कम करने और स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव घटाने के लिए भी प्रयास करना है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि महंगी सिगरेट और टैक्स बढ़ोतरी, लोगों को धूम्रपान छोड़ने के लिए प्रेरित कर सकती है।
निष्कर्ष: नए साल की शुरुआत में सिगरेट महंगी हुई है, और उपभोक्ताओं को अब अतिरिक्त खर्च के लिए तैयार रहना होगा। टैक्स बढ़ोतरी का असर बाजार के हर स्तर पर दिख रहा है, जिससे सरकार की तंबाकू नियंत्रण नीति भी प्रभावी साबित हो रही है।







